Friday, April 1, 2016

भीड़ की महारत (कविता) - चार्ल्स ब्युकोवस्की

(चार्ल्स ब्युकोवस्की, जर्मन मूल के अमेरिकी कवि-कथाकार)
छल, हिंसा और व्यर्थता से इतना भरा होता है एक औसत आदमी
कि पर्याप्त वह किसी सेना के एक दिन के लिये

और सबसे काबिल हत्यारे हैं वे जो हत्या के ख़िलाफ़ प्रवचन देते हैं
और सबसे अधिक घृणा करते हैं वे जो प्रेम की शिक्षायें देते है
और अंततः सबसे अधिक जंगख़ोर हैं वे जो शांति के उपदेश देते हैं

जो हरिकथा सुनाते हैं उन्हें ज़रूरत है भगवान की
जो शांति के उपदेश देते हैं नहीं है उनके पास शांति
जो प्रेम की शिक्षा देते हैं नहीं है उनके पास प्रेम

उपदेशकों से सावधान रहो
सावधान रहो विद्वानों से
उनसे सावधान रहो जो हमेशा ही पढ़ते रहते हैं किताबें
उनसे सावधान रहो जो ग़रीबी से घृणा करते हैं
या कि जिन्हें गर्व है इस पर
उनसे सावधान रहो जो प्रशंसा करने में नहीं लगाते देर
कि बदले में चाहिये होती है उन्हें प्रशंसा
सावधान रहो उनसे जो तुरत लगाते हैं सेंसर
कि वे डरते हैं उससे जो वे नहीं जानते
सावधान रहो उनसे जो हर वक़्त ढ़ूंढ़ते हैं भीड़
कि अकेले कुछ भी नहीं वे
औसत आदमी से सावधान रहो, औसत औरत से और
सावधान रहो उनके प्यार से
औसत है उनका प्यार और औसत को ही ढ़ूंढ़ता है

लेकिन उनकी महारत नफ़रत में है
इतनी महारत है उनकी नफ़रत में
कि कर सकती है तुम्हारी
या किसी की भी हत्या

जो नहीं चाहते एकांत
जो नहीं समझते एकांत को
वे हर उस चीज़ को नष्ट करने के लिये तैयार होंगे
जो अलग है उनकी चीज़ों से
चूंकि ख़ुद नहीं कर सकते सृजन किसी कला का
वे नहीं समझेंगे कला को
सर्जक के रूप में अपनी असफलता को
वे केवल दुनिया की असफलता की तरह समझेंगे
पूरी तरह से प्यार करने में अक्षम
वे समझेंगे कि अधूरा है तुम्हारा प्यार
और फिर वे तुमसे नफ़रत करेंगे
और उनकी नफ़रत बिल्कुल निष्कलंक होगी

चमकते हीरे की तरह
चाकू की तरह
पर्वतशिखर की तरह
चीते की तरह
धतूरे की तरह


अनुवादक :- अशोक कुमार पाण्डेय 

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