Thursday, June 14, 2012

ओरहान वेली की कवितायेँ

अपनी मातृभूमि के लिए

क्या कुछ नहीं किया हमने अपनी मातृभूमि के लिए !
किसी ने दी जान अपनी ;
किसी ने दिए भाषण



घर के भीतर

सबसे अच्छी होती हैं खिड़कियाँ :
कम से कम देख तो सकते हैं आप उड़ते हुए परिंदे
चारो तरफ दीवालों को घूरने की बजाए

अकेलापन

जो नहीं रहते अकेले जान ही नहीं सकते कभी
कि कैसे खामोशी से पैदा होता है डर,
कैसे बातें करता है कोई खुद से
और भागता फिरता है आइनों के बीच
एक ज़िंदा शख्स की तलाश में
समझ ही नहीं सकते वे सचमुच



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