Monday, October 1, 2012

कुछ पसंदीदा शेर

'जफर' आदमी उसको न जानिएगा,
हो वो कैसा ही साहिबे-फहमो-जका।
जिसे ऐश में यादे - खुदा न रहा,
जिसे तैश में खौफे - खुदा न रहा।

-'जफर'


XXX 

जहाँ इन्सानियत वहशत के आगे जिबह होती है,
वहां जिल्लत है दम लेना वहां बेहतर है मर जाना।

- गुलजार देहलवी


XXX

यह इन्किलाबे - दौरे - जमाना तो देखिए,
मंजिल पै वो मिले जो शरीके-सफर न थे।

- अनवर साबरी


XXX

आसमानों से फरिश्ते जो उतारे जाएं,
वह भी इस दौर में सच बोलें तो मारे जाएं 

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दर्द वो भी सहा है तेरे लिए मेरी किस्मत में जो लिखा भी नहीं

दिल को अब तक यक़ी न आ सका यूँ नहीं हैं के वो मिला भी नहीं

Wife of JaunEliya Sb

दोस्त की बज़्म ही वो बज़्म है 'अमजद' कि जहाँ अक्ल को साथ में रखना बड़ी नादानी है

पहले सौ बार इधर उधर देखा तब तुझे डर के इक नज़र देखा -सय्यद मोहम्मद असर

मैंने तिरी बातों को कभी झूट कहा था इस जुर्म पे हर झूट को सच मान लिया है

इक दूर से आती है, पास आ के पलटती है । इक राह अकेली सी, रुकती है ना चलती है ।।

रोने के भी आदाब हुआ करते हैं 'फ़ानी' .. ये उस की गली है, तेरा ग़म-ख़ाना नहीं है ..

बेठिकानो को ठिकाने लगाने की बात करते हो
कितने झूठे हो, हर किसी से यही कहते हो
- संजीव के झा


फ़ासलों का एहसास तब हुआ जब मैंने कहा "ठीक हूँ" और उसने मान भी लिया...

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