Friday, April 8, 2016

अमीर खुसरो की रचनाएँ

(अमीर खुसरो)



1. बन बोलन लागे मोर
आ घिर आई दई मारी घटा कारी। बन बोलन लागे मोर
दैया री बन बोलन लागे मोर।
रिम-झिम रिम-झिम बरसन लागी छाई री चहुँ ओर।
आज बन बोलन लागे मोर।
कोयल बोले डार-डार पर पपीहा मचाए शोर।
आज बन बोलन मोर.........
ऐसे समय साजन परदेस गए बिरहन छोर।
आज बन बोलन मोर.........

2. छाप तिलक सब छीनी
अपनी छवि बनाइ के जो मैं पी के पास गई,
जब छवि देखी पीहू की तो अपनी भूल गई।
छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैंना मिलाइ के
बात अघम कह दीन्हीं रे मोसे नैंना मिलाइ के।
बल बल जाऊँ मैं तोरे रंगरिजवा
अपनी सी रंग दीन्हीं रे मोसे नैंना मिलाइ के।
प्रेम बटी का मदवा पिलाय के मतवारी कर दीन्हीं रे
मोसे नैंना मिलाइ के।
गोरी-गोरी बइयाँ हरी - हरी चुरियाँ
बइयाँ पकर हर लीन्हीं रे मोसे नैंना मिलाइ के।
खुसरो निजाम के बल-बल जइए
मोहे सुहागन कीन्हीं रे मोसे नैंना मिलाइ के।

3. सावन आया
अम्मा मेरे बाबा को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा बाबा तो बूढ़ा री - कि सावन आया
अम्मा मेरे भाई को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा भाई तो बाला री - कि सावन आया
अम्मा मेरे मामू को भेजो री - कि सावन आया
बेटी तेरा मामू तो बांका री - कि सावन आया

4. मोरे पिया घर आए
री सखी मोरे पिया घर आएभाग लगे इस आँगन को
बल-बल जाऊँ मैं अपने पिया केचरन लगायो निर्धन को।
मैं तो खड़ी थी आस लगाएमेंहदी कजरा माँग सजाए।
देख सुरतिया अपने पिया कीहार गई मैं तन मन को।
जिसका पिया संग बीते सावनउस दुल्हन की रैन सुहागन।
जिस सावन में पिया घर नाहिआग लगे उस सावन को।
अपने पिया को मैं किस विध पाऊँलाज की मारी मैं तो डूबी डूबी जाऊँ
तुम ही जतन करो ऐ री सखी रीमै मन भाऊँ साजन को।

5. काहे को ब्याहे बिदेस
काहे को ब्याहे बिदेस,
अरेलखिय बाबुल मोरे काहे को ब्याहे बिदेस
भैया को दियो बाबुल महले दो-महले
हमको दियो परदेस अरेलखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस
हम तो बाबुल तोरे खूँटे की गैयाँ
जित हाँके हँक जैहें अरेलखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

हम तो बाबुल तोरे बेले की कलियाँ
घर-घर माँगे हैं जैहें अरेलखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

कोठे तले से पलकिया जो निकली
बीरन ने खाए पछाड़ अरेलखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

हम तो हैं बाबुल तोरे पिंजरे की चिड़ियाँ
भोर भये उड़ जैहें अरेलखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

तारों भरी मैनें गुड़िया जो छोड़ी
छूटा सहेली का साथ अरेलखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

डोली का पर्दा उठा के जो देखा
आया पिया का देस अरेलखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

अरेलखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस अरेलखिय बाबुल मोरे

6. जब यार देखा नैन भर
जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर
ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर।

जब आँख से ओझल भयातड़पन लगा मेरा जिया
हक्का इलाही क्या कियाआँसू चले भर लाय कर।

तू तो हमारा यार हैतुझ पर हमारा प्यार है
तुझ दोस्ती बिसियार है एक शब मिलो तुम आय कर।

जाना तलब तेरी करूँ दीगर तलब किसकी करूँ
तेरी जो चिंता दिल धरूँएक दिन मिलो तुम आय कर।

मेरा जो मन तुमने लियातुमने उठा गम को दिया
तुमने मुझे ऐसा कियाजैसा पतंगा आग पर।

खुसरो कहै बातां ग़ज़बदिल में न लावे कुछ अजब
कुदरत खुदा की है अजबजब जिव दिया गुल लाय कर।

7. ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल
ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल,
दुराये नैना बनाये बतियां।
कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऎ जान,
न लेहो काहे लगाये छतियां।।

शबां-ए-हिजरां दरज़ चूं ज़ुल्फ़
वा रोज़-ए-वस्लत चो उम्र कोताह,
सखी पिया को जो मैं न देखूं
तो कैसे काटूं अंधेरी रतियां।

यकायक अज़ दिलदो चश्म-ए-जादू
ब सद फ़रेबम बाबुर्द तस्कीं,
किसे पडी है जो जा सुनावे
पियारे पी को हमारी बतियां।

चो शमा सोज़ानचो ज़र्रा हैरान
हमेशा गिरयानबे इश्क आं मेह।
न नींद नैनाना अंग चैना
ना आप आवेंन भेजें पतियां।

बहक्क-ए-रोज़ेविसाल-ए-दिलबर
कि दाद मारागरीब खुसरौ।
सपेट मन केवराये राखूं
जो जाये पाऊँपिया के खटियां।।

8. पिया आवन कह गए अजहुँ न आए
पिया आवन कह गए अजहुँ न आएअजहुँ न आए स्वामी हो
ऐ जो पिया आवन कह गए अजुहँ न आए। अजहुँ न आए स्वामी हो।
स्वामी होस्वामी हो। आवन कह गएआए न बारह मास।
जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए। अजहुँ न आए।
आवन कह गए। आवन कह गए।

9. जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्या
जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्याघुँघटा में आग लगा देती,
मैं लाज के बंधन तोड़ सखी पिया प्यार को अपने मना लेती।
इन चुरियों की लाज पिया रखनाये तो पहन लई अब उतरत ना
मोरा भाग सुहाग तुमई से है मैं तो तुम ही पर जुबना लुटा बैठी
मोरे हार सिंगार की रात गईपियू संग उमंग की बात गई
पियू संग उमंग मेरी आस नई।

10. अब आए न मोरे साँवरिया
अब आए न मोरे साँवरियामैं तो तन मन उन पर लुटा देती।
घर आए न मोरे साँवरियामैं तो तन मन उन पर लुटा देती।
मोहे प्रीत की रीत न भाई सखीमैं तो बन के दुल्हन पछताई सखी।
होती न अगर दुनिया की शरम मैं तो भेज के पतियाँ बुला लेती।
उन्हें भेज के सखियाँ बुला लेती।

11. तोरी सूरत के बलिहारी
तोरी सूरत के बलिहारीनिजाम,
तोरी सूरत के बलिहारी ।
सब सखियन में चुनर मेरी मैली,
देख हसें नर नारीनिजाम...
अबके बहार चुनर मोरी रंग दे,
पिया रखले लाज हमारीनिजाम....
सदका बाबा गंज शकर का,
रख ले लाज हमारीनिजाम...
कुतबफरीद मिल आए बराती,
खुसरो राजदुलारीनिजाम...
कोउ सास कोउ ननद से झगड़े,
हमको आस तिहारीनिजाम,
तोरी सूरत के बलिहारीनिजाम...

12 चल खुसरो घर आपने
खुसरो रैन सुहाग कीजागी पी के संग।
तन मेरो मन पियो कोदोउ भए एक रंग।।

खुसरो दरिया प्रेम काउल्टी वा की धार।
जो उतरा सो डूब गयाजो डूबा सो पार।।

खीर पकायी जतन सेचरखा दिया जला।
आया कुत्ता खा गयातू बैठी ढोल बजा।।

गोरी सोवे सेज परमुख पर डारे केस।
चल खुसरो घर आपनेसांझ भयी चहु देस।।

खुसरो मौला के रुठतेपीर के सरने जाय।
कहे खुसरो पीर के रुठतेमौला नहिं होत सहाय।।

13. बहुत कठिन है डगर पनघट की 
बहुत कठिन है डगर पनघट की
कैसे मैं भर लाऊं मधवा से मटकी
पनिया भरन को मैं जो गई थी
दौड़ झपट मोरी मटकी पटकी?
खुसरो निजाम के बल बल जइये
लाज रखो मोरे घूंघट पट की

14. बहुत दिन बीते पिया को देखे
बहुत दिन बीते पिया को देखे,
अरे कोई जाओपिया को बुलाय लाओ
मैं हारी वो जीते पिया को देखे बहुत दिन बीते।
सब चुनरिन में चुनर मोरी मैली,
क्यों चुनरी नहीं रंगते?
बहुत दिन बीते।
खुसरो निजाम के बलि बलि जइए,
क्यों दरस नहीं देते?
बहुत दिन बीते।

15. बहुत रही बाबुल घर दुल्हन
बहुत रही बाबुल घर दुल्हनचल तोरे पी ने बुलाई।
बहुत खेल खेली सखियन सेअन्त करी लरिकाई।


बिदा करन को कुटुम्ब सब आएसगरे लोग लुगाई।
चार कहार मिल डोलिया उठाईसंग परोहत और भाई।
चले ही बनेगी होत कहाँ हैनैनन नीर बहाई।
अन्त बिदा हो चलि है दुल्हिनकाहू कि कछु न बने आई।
मौज-खुसी सब देखत रह गएमात पिता और भाई।
मोरी कौन संग लगन धराईधन-धन तेरि है खुदाई।
बिन मांगे मेरी मंगनी जो कीन्हीनेह की मिसरी खिलाई।
एक के नाम कर दीनी सजनीपर घर की जो ठहराई।
गुन नहीं एक औगुन बहुतेरेकैसे नौशा रिझाई।
खुसरो चले ससुरारी सजनीसंग कोई नहीं आई।

16. आज रंग है ऐ माँ रंग है री
आज रंग है ऐ माँ रंग है री,
मेरे महबूब के घर रंग है री।
अरे अल्लाह तू है हर,
मेरे महबूब के घर रंग है री।

मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया,
निजामुद्दीन औलिया-अलाउद्दीन औलिया।
अलाउद्दीन औलियाफरीदुद्दीन औलिया,
फरीदुद्दीन औलियाकुताबुद्दीन औलिया।
कुताबुद्दीन औलिया मोइनुद्दीन औलिया,
मुइनुद्दीन औलिया मुहैय्योद्दीन औलिया।
आ मुहैय्योदीन औलियामुहैय्योदीन औलिया।
वो तो जहाँ देखो मोरे संग है री।

अरे ऐ री सखी री,
वो तो जहाँ देखो मोरो (बर) संग है री।
मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया,
आहेआहे आहे वा।
मुँह माँगे बर संग है री,
वो तो मुँह माँगे बर संग है री।

निजामुद्दीन औलिया जग उजियारो,
जग उजियारो जगत उजियारो।
वो तो मुँह माँगे बर संग है री।
मैं पीर पायो निजामुद्दीन औलिया।
गंज शकर मोरे संग है री।
मैं तो ऐसो रंग और नहीं देख्यो सखी री।
मैं तो ऐसी रंग।
देस-बदेस में ढूढ़ फिरी हूँदेस-बदेस में।
आहेआहे आहे वा,
ऐ गोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मुँह माँगे बर संग है री।

सजन मिलावरा इस आँगन मा।
सजनसजन तन सजन मिलावरा।
इस आँगन में उस आँगन में।
अरे इस आँगन में वो तोउस आँगन में।
अरे वो तो जहाँ देखो मोरे संग है री।
आज रंग है ऐ माँ रंग है री।

ऐ तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मैं को तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मुँह माँगे बर संग है री।
मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी सखी री।
ऐ महबूबे इलाही मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी।
देस विदेश में ढूँढ़ फिरी हूँ।
आज रंग है ऐ माँ रंग है री।
मेरे महबूब के घर रंग है री।

17. मोरा जोबना
मोरा जोबना नवेलरा भयो है गुलाल।
कैसे घर दीन्हीं बकस मोरी माल।
निजामुद्दीन औलिया को कोई समझाए,
ज्यों-ज्यों मनाऊँ वो तो रुसो ही जाए।
चूडियाँ फोड़ूं पलंग पे डारुँ
इस चोली को मैं दूँगी आग लगाए।
सूनी सेज डरावन लागै।
बिरहा अगिन मोहे डस डस जाए।
मोरा जोबना।

18. सकल बन फूल रही सरसों
सकल बन (सघन बन) फूल रही सरसों,
सकल बन (सघन बन) फूल रही....
अम्बवा फूटेटेसू फूलेकोयल बोले डार डार,
और गोरी करत शृंगार,
मलनियां गढवा ले आई करसों,
सकल बन फूल रही...
तरह तरह के फूल खिलाए,
ले गढवा हातन में आए।
निजामुदीन के दरवाजे पर,
आवन कह गए आशिक रंग,
और बीत गए बरसों।
सकल बन फूल रही सरसों।

19 .रैनी चढ़ी रसूल की सो रंग मौला के हाथ
रैनी चढ़ी रसूल की सो रंग मौला के हाथ।
जिसके कपरे रंग दिए सो धन धन वाके भाग।।

खुसरो बाजी प्रेम की मैं खेलूँ पी के संग।
जीत गयी तो पिया मोरे हारी पी के संग।।

चकवा चकवी दो जने इन मत मारो कोय।
ये मारे करतार के रैन बिछोया होय।।

खुसरो ऐसी पीत कर जैसे हिन्दू जोय।
पूत पराए कारने जल जल कोयला होय।।

खुसरवा दर इश्क बाजी कम जि हिन्दू जन माबाश।
कज़ बराए मुर्दा मा सोज़द जान-ए-खेस रा।।

उजवल बरन अधीन तन एक चित्त दो ध्यान।
देखत में तो साधु है पर निपट पाप की खान।।

श्याम सेत गोरी लिए जनमत भई अनीत।
एक पल में फिर जात है जोगी काके मीत।।

पंखा होकर मैं डुलीसाती तेरा चाव।
मुझ जलती का जनम गयो तेरे लेखान भाव।।

नदी किनारे मैं खड़ी सो पानी झिलमिल होय।
पी गोरे मैं साँवरी अब किस विध मिलना होय।।

साजन ये मत जानियो तोहे बिछड़त मोको चैन।
दिया जलत है रात में और जिया जलत बिन रैन।।

रैन बिना जग दुखी और दुखी चन्द्र बिन रैन।
तुम बिन साजन मैं दुखी और दुखी दरस बिन नैंन।।

अंगना तो परबत भयोदेहरी भई विदेस।
जा बाबुल घर आपनेमैं चली पिया के देस।।


20. आ साजन मोरे नयनन में
आ साजन मोरे नयनन मेंसो पलक ढाप तोहे दूँ।
न मैं देखूँ औरन कोन तोहे देखन दूँ।

अपनी छवि बनाई के जो मैं पी के पास गई।
जब छवि देखी पीहू की तो अपनी भूल गई।।

खुसरो पाती प्रेम की बिरला बाँचे कोय।
वेदकुरानपोथी पढ़ेप्रेम बिना का होय।।

संतों की निंदा करेरखे पर नारी से हेत।
वे नर ऐसे जाऐंगेजैसे रणरेही का खेत।।

खुसरो सरीर सराय है क्यों सोवे सुख चैन।
कूच नगारा सांस काबाजत है दिन रैन।।

21. होली
(क) दैया री मोहे भिजोया री
दैया री मोहे भिजोया री
शाह निजाम के रंग में
कपडे रंग के कुछ न होत है,
या रंग मैंने मन को डुबोया री
दैया री मोहे भिजोया री
(ख) हजरत ख्वाजा संग खेलिए धमाल

हजरत ख्वाजा संग खेलिए धमाल,
बाइस ख्वाजा मिल बन बन आयो
तामें हजरत रसूल साहब जमाल। हजरत ख्वाजा संग..
अरब यार तेरो (तोरी) बसंत मनायो,
सदा रखिए लाल गुलाल। हजरत ख्वाजा संग ...

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