Saturday, June 25, 2016

सिगरेट की तरह

तुम सिगरेट की तरह
बहुत बाद में आई मेरी जिंदगी में
और मौत की तरह
सबसे बाद में जाओगी शायद
तुम्हारे आने के बाद
और जाने से पहले का समय
धुएँ के शहर में,
रास्ता भूला हुआ समय है
जिसकी पीठ पर कांटे
और पांवों में पर्वत उग आयें हैं

तुम्हे जिसने भी बनाया है
उस पर मुक़दमा होना चाहिए
क्योंकि उसने नहीं लिखा तुम्हारे माथे पर
“
तुम्हे पीना जानलेवा हो सकता है”
जैसे लिखा होता है सिगरेट पर

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